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यूएई के परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर ड्रोन हमला, भारत समेत कई देशों ने जताई चिंता

June 1, 2026 (Last updated: May 18, 2026) 1 minute read
यूएई के न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमला1

यूएई के न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमला

संयुक्त अरब अमीरात के बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हुए ड्रोन हमले के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। रविवार रात अबू धाबी के अल दफ़रा क्षेत्र स्थित इस परमाणु ऊर्जा संयंत्र को निशाना बनाया गया, जिसके बाद वहां आग लग गई। हालांकि यूएई प्रशासन ने दावा किया है कि आग पर तुरंत काबू पा लिया गया और किसी तरह की रेडियोलॉजिकल लीक या जनहानि नहीं हुई।

यूएई के सरकारी मीडिया कार्यालय के अनुसार, ड्रोन हमले में पावर प्लांट की सीमा के बाहर स्थित एक बिजली जनरेटर में आग लगी थी। अधिकारियों ने बताया कि संयंत्र की सुरक्षा प्रणाली और परमाणु रिएक्टर पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा सभी यूनिट सामान्य रूप से काम कर रही हैं।

इस घटना के बाद भारत ने भी गहरी चिंता जताई है। भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि किसी भी परमाणु सुविधा को निशाना बनाना “अस्वीकार्य” है और इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक बातचीत की राह अपनाने की अपील की।

वहीं अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने भी हमले पर चिंता व्यक्त की है। एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने यूएई के विदेश मंत्री से बातचीत कर घटना की निंदा की और परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।

यूएई के न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमला

सऊदी अरब ने भी इस हमले को “आतंकवादी कार्रवाई” करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। सऊदी सरकार ने कहा कि ऐसे हमले पूरे क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।

हाल के दिनों में ईरान और यूएई के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यूएई का आरोप है कि ईरान समर्थित तत्वों ने उसकी नागरिक और रणनीतिक सुविधाओं को कई बार निशाना बनाया है। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि उसने केवल सैन्य ठिकानों और अमेरिका-इसराइल से जुड़े संस्थानों को निशाना बनाया।

बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट यूएई की ऊर्जा व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। दक्षिण कोरिया के सहयोग से बने इस प्लांट के चार रिएक्टर देश की लगभग 25 प्रतिशत बिजली जरूरत पूरी करते हैं। यह संयंत्र यूएई की स्वच्छ ऊर्जा नीति और कार्बन उत्सर्जन कम करने की रणनीति का प्रमुख आधार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले मध्य पूर्व में सुरक्षा संकट को और गंभीर बना सकते हैं। ऐसे समय में जब पहले ही क्षेत्र में अमेरिका, ईरान और इसराइल के बीच तनाव चरम पर है, यूएई के परमाणु संयंत्र पर हमला वैश्विक चिंता का विषय बन गया है।

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