नई दिल्ली। लगभग दो वर्षों के अंतराल के बाद विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) की महत्वपूर्ण बैठक दिल्ली में आयोजित हुई। इस बैठक में गठबंधन को अधिक सक्रिय और संगठित बनाने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि गठबंधन के भीतर कांग्रेस की स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है, जबकि कुछ क्षेत्रीय दलों की राजनीतिक ताकत कमजोर पड़ने से नए राजनीतिक समीकरण उभर रहे हैं।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब इंडिया गठबंधन की बैठक हर दो महीने में नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। इसके अलावा आगामी संसद सत्र के दौरान विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय के लिए प्रतिदिन बैठक करने का फैसला भी लिया गया है। इन बैठकों की अध्यक्षता लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी करेंगे।
बैठक में कई प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी। इनमें चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता, मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे, शिक्षा क्षेत्र में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और संसद में संयुक्त रणनीति शामिल हैं।
गौरतलब है कि 2024 में हुई पिछली बैठक में 25 क्षेत्रीय दल शामिल हुए थे, जबकि इस बार यह संख्या घटकर 23 रह गई। पहले जहां कई गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री गठबंधन की बैठकों में शामिल होते थे, वहीं इस बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ही एकमात्र गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री के रूप में मौजूद रहे।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भाजपा के बढ़ते प्रभाव के कारण कई क्षेत्रीय दल कमजोर हुए हैं, जिससे कांग्रेस गठबंधन के भीतर अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। हालांकि गठबंधन के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
तमिलनाडु में डीएमके के गठबंधन से दूरी बनाने और अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के अभी तक गठबंधन में शामिल न होने के कारण दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु से प्रतिनिधित्व की कमी महसूस की जा रही है। इसी तरह आंध्र प्रदेश और असम जैसे राज्यों में भी गठबंधन की उपस्थिति कमजोर नजर आती है।
बैठक के दौरान कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुलाकात भी चर्चा का विषय रही। दोनों नेताओं ने गठबंधन की एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया।
इंडिया गठबंधन की अगली बैठक 1 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित की जाएगी। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों और संसद के मानसून सत्र को देखते हुए यह बैठक गठबंधन की भविष्य की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विपक्षी दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न राज्यों में अपने राजनीतिक हितों और गठबंधन की एकता के बीच संतुलन बनाए रखना होगी। वहीं कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच तालमेल आगामी चुनावी राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
