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बैंक से पैसे निकालने के लिए बहन का कंकाल लेकर पहुंचा भाई, जानिए ज़िला प्रशासन ने क्या कहा

सितम्बर 19, 2026 (अंतिम अद्यतन: अप्रैल 29, 2026) 1 मिनट पढ़ें
Odisha news brother carries skeleton

बहन के खाते से पैसे निकालने के लिए कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई

बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई
सोमवार दोपहर, ओडिशा ग्रामीण बैंक की एक शाखा में अचानक अफरा-तफरी मच गई, जब 52 वर्षीय जीतू मुंडा अपने कंधे पर कंकाल लेकर अंदर दाखिल हुए। वहां मौजूद कर्मचारी और ग्राहक यह नज़ारा देखकर हैरान रह गए।

दरअसल, जीतू मुंडा अपनी बहन कलरा मुंडा के बैंक खाते से 19,300 रुपये निकालना चाहते थे। उनकी बहन की दो महीने पहले मौत हो चुकी थी, लेकिन बैंक की प्रक्रिया और दस्तावेज़ी औपचारिकताओं के कारण वह पैसे नहीं निकाल पा रहे थे।

मजबूरी ने लिया ये रूप
जीतू का कहना है कि वह कई बार बैंक गए और मैनेजर को समझाने की कोशिश की कि उनकी बहन अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन बैंक की ओर से बार-बार यही कहा गया कि खाताधारक को खुद आना होगा या फिर मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस के दस्तावेज़ पेश करने होंगे।

बार-बार ठुकराए जाने के बाद, निराश और परेशान जीतू ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने सबको चौंका दिया। वह गांव के श्मशान घाट पहुंचे, बहन के अवशेष निकाले, उन्हें एक बोरी में रखा और करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक तक ले आए—ताकि अपनी बात का “सबूत” दे सकें।

बैंक में मचा हड़कंप
बैंक परिसर में जैसे ही लोगों ने यह दृश्य देखा, हर कोई सन्न रह गया। स्थिति को संभालने के लिए तुरंत पुलिस और स्थानीय प्रशासन (बीडीओ) को बुलाया गया।

अधिकारियों ने जीतू को समझाया कि उनकी बात सुनी जाएगी और उन्हें कंकाल वापस श्मशान में रखने के लिए कहा। इसके बाद जीतू फिर से उसी कंकाल को कंधे पर उठाकर श्मशान घाट लौट गए।

बैंक का पक्ष
बैंक मैनेजर सुषांत कुमार सेठी के अनुसार, जीतू पहले यह कह रहे थे कि उनकी बहन बीमार हैं और आ नहीं सकतीं। बाद में उन्होंने बताया कि उनकी मृत्यु हो चुकी है।

मैनेजर का कहना है कि खाते में अन्य कानूनी वारिस भी थे, इसलिए नियमों के अनुसार दस्तावेज़ मांगे गए थे।

आखिरकार मिला पैसा
जांच के बाद 28 अप्रैल को खाते में जमा लगभग 19,410 रुपये जीतू और अन्य दो कानूनी वारिसों को सौंप दिए गए। पुलिस ने सभी को यह रकम आपस में बांटने को कहा।

प्रशासन ने जताई चिंता
इस घटना के सामने आने के बाद ज़िला प्रशासन ने गहरी चिंता व्यक्त की है। प्रशासन का कहना है कि जनता के अधिकार और सम्मान की रक्षा करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

साथ ही, प्रशासन ने जीतू मुंडा को जिला रेड क्रॉस फंड से 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी है और जरूरी दस्तावेज़—जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र—भी जारी कर दिए हैं।

राज्य के राजस्व मंत्री ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सवाल जो पीछे छोड़ गई ये घटना
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मजबूरी नहीं दिखाती, बल्कि यह भी बताती है कि सिस्टम की जटिल प्रक्रियाएं कभी-कभी आम इंसान को कितनी हद तक मजबूर कर देती हैं।

क्या नियमों के साथ संवेदनशीलता भी जरूरी नहीं?
और क्या ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए व्यवस्था में बदलाव की जरूरत नहीं है?

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