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Success Story: डॉक्टर की नौकरी छोड़ खेती में आजमाई किस्मत, अब करोड़ों का कारोबार खड़ा कर बने मिसाल

अक्टूबर 15, 2026 (अंतिम अद्यतन: मई 12, 2026) 1 मिनट पढ़ें
डॉ. श्रीनिवास राव माधवराम

श्रीनिवास राव माधवराम

डॉ. श्रीनिवास राव माधवराम की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपने जुनून को करियर बनाना चाहते हैं। हैदराबाद के रहने वाले डॉ. श्रीनिवास ने डॉक्टर की सफल नौकरी छोड़कर खेती की राह चुनी और आज वह करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा कर चुके हैं।

उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर सही सोच, तकनीक और मेहनत हो तो खेती सिर्फ परंपरागत पेशा नहीं, बल्कि एक बड़ा बिजनेस मॉडल भी बन सकती है।

डॉक्टर से किसान बनने तक का सफर
डॉ. श्रीनिवास राव माधवराम पेशे से एक अनुभवी चिकित्सक हैं। उन्होंने तेलंगाना के ममता मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और इंटरनल मेडिसिन में एमडी की पढ़ाई की। शहर की भागदौड़, प्रदूषण और तनाव भरी जिंदगी से परेशान होकर उन्होंने प्रकृति के करीब जाने का फैसला किया।

इसी सोच के साथ उन्होंने तेलंगाना के संगारेड्डी इलाके में करीब 20 एकड़ जमीन खरीदी। शुरुआत में उनका मकसद केवल अपने परिवार के लिए ऑर्गेनिक फल और सब्जियां उगाना था, लेकिन धीरे-धीरे यही शौक उनके जीवन का नया मिशन बन गया।

पहली कोशिश में मिली बड़ी असफलता
खेती की शुरुआत आसान नहीं रही। डॉ. श्रीनिवास ने ड्रैगन फ्रूट के करीब 3,000 पौधे लगाए, लेकिन उनमें से लगभग 90 प्रतिशत खराब हो गए। यह उनके लिए बड़ा झटका था।

हालांकि उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी गलतियों से सीखने का फैसला किया। उन्हें समझ आया कि आधुनिक खेती में तकनीकी ज्ञान और उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की सबसे बड़ी भूमिका होती है।

विदेश जाकर सीखी आधुनिक खेती
अपनी खेती को सफल बनाने के लिए डॉ. श्रीनिवास ने रिसर्च शुरू की। उन्होंने भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR) से संपर्क किया और फिर दुनिया के कई देशों की यात्रा की।

उन्होंने वियतनाम, थाईलैंड, इजरायल और ताइवान जैसे देशों में जाकर ड्रैगन फ्रूट और विदेशी फलों की आधुनिक खेती की तकनीकों को करीब से समझा। इसके बाद उन्होंने 2018 में NBPGR के साथ मिलकर दुनिया भर से ड्रैगन फ्रूट की 36 हाई-यील्ड किस्मों को कानूनी तरीके से भारत में आयात किया।

किसानों के लिए शुरू किया ‘डेक्कन एक्जॉटिक्स’
जब उनकी खेती सफल होने लगी तो आसपास के किसान उनसे सलाह लेने आने लगे। इसी के बाद उन्होंने 2019 में ‘डेक्कन एक्जॉटिक्स’ नाम से एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) की शुरुआत की।

यह संस्था किसानों को केवल पौधे ही उपलब्ध नहीं कराती, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक खेती, मिट्टी परीक्षण, सिंचाई तकनीक, फसल प्रबंधन और मार्केटिंग तक की ट्रेनिंग भी देती है।

आज यह संगठन देश के 23 राज्यों में 3,700 से ज्यादा किसानों के नेटवर्क के रूप में काम कर रहा है।

करोड़ों रुपये का कारोबार
डॉ. श्रीनिवास का मॉडल अब एक सफल एग्री-बिजनेस के रूप में सामने आया है। वित्त वर्ष 2025-26 में उनके संगठन ‘डेक्कन एक्जॉटिक्स’ और उससे जुड़े संयुक्त उद्यमों ने करीब ₹3.39 करोड़ का टर्नओवर हासिल किया।

अब उनका फोकस केवल विदेशी फल उगाने तक सीमित नहीं है। वे वैल्यू ऐडेड प्रोडक्ट्स जैसे कोल्ड-प्रेस्ड एवोकाडो ऑयल और अन्य प्रोसेस्ड उत्पादों पर भी काम कर रहे हैं।

खेती को बना दिया प्रेरणा की मिसाल
डॉ. श्रीनिवास राव माधवराम की कहानी यह दिखाती है कि अगर खेती को वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीक के साथ किया जाए तो यह युवाओं के लिए बेहद लाभकारी करियर बन सकती है।

उन्होंने न केवल खुद सफलता हासिल की, बल्कि हजारों किसानों की जिंदगी बदलने का काम भी किया। आज उनकी पहचान सिर्फ एक डॉक्टर के रूप में नहीं, बल्कि एक सफल एग्री-उद्यमी और प्रेरणादायक किसान नेता के तौर पर भी हो रही है।

सफेद कोट छोड़कर खेती को अपनाने का फैसला डॉ. श्रीनिवास के लिए जिंदगी बदलने वाला साबित हुआ। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि भारत में आधुनिक खेती और एग्री-स्टार्टअप का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।

जो लोग खेती को केवल पारंपरिक पेशा मानते हैं, उनके लिए डॉ. श्रीनिवास की कहानी एक नई सोच और नई दिशा देने वाली प्रेरणा है।

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