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सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल पहुंचाया, भूख हड़ताल के बीच बढ़ी हलचल

नवम्बर 3, 2026 (अंतिम अद्यतन: जुलाई 18, 2026) 1 मिनट पढ़ें
Sonam Wangchuk escorted to hospital

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। वांगचुक कथित नीट परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे और शनिवार को उनकी हड़ताल 21वें दिन में प्रवेश कर गई।

पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान जंतर-मंतर पर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक स्थल खाली करने की अपील भी की।

मुख्य बातें :

  • सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।
  • भूख हड़ताल 21वें दिन में पहुंची थी।
  • दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की सलाह के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।
  • जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
  • कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने का दावा।
  • 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च से पहले घटनाक्रम ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज कर दी।

पुलिस ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के आधार पर की गई।

पुलिस के अनुसार, सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल के लिए अस्पताल ले जाया गया।

पुलिस ने यह भी कहा कि कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे थोड़ी देर के लिए अफरातफरी की स्थिति बनी। हालांकि पुलिस ने संयम बरतते हुए पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की।

साथ ही पुलिस ने जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे शांतिपूर्वक प्रदर्शन स्थल खाली कर दें।

प्रदर्शनकारियों का आरोप
इस घटनाक्रम के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें हिरासत में ले लिया।

वहीं पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रों और समर्थकों के साथ सख्ती की तथा कई लोगों को रोका गया।

हालांकि इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से अलग से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में सुनवाई के दौरान केंद्र और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखें।

अदालत ने कहा था कि यदि डॉक्टरों की राय में उनकी स्थिति गंभीर होती है, तो उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि संबंधित अधिकारी चिकित्सकीय सलाह के आधार पर आवश्यक निर्णय ले सकते हैं।

यह पहली बार था जब इस प्रदर्शन को लेकर अदालत ने प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप किया।

क्या है पूरा मामला?
सोनम वांगचुक कथित नीट परीक्षा में अनियमितताओं और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे थे।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना।
  • कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
  • शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना।
  • संबंधित मुद्दों पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री से जवाबदेही तय करना।

20 जुलाई के संसद मार्च से पहले बढ़ा घटनाक्रम
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने की घोषणा की गई थी।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस मार्च के माध्यम से परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को और तेज किया जाएगा।

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित संसद मार्च और आगे के आंदोलन की रणनीति में क्या बदलाव होता है।

आगे क्या?
फिलहाल सोनम वांगचुक का इलाज सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टर लगातार निगरानी रख रहे हैं। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर पुलिस की मौजूदगी बनी हुई है और प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है।

इस घटनाक्रम ने शिक्षा व्यवस्था, लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में अदालत, प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के अगले कदम पर सभी की नजर रहेगी।

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