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CJP विरोध प्रदर्शन: देखिए, कौन भर रहा है आंदोलनकारियों की जेब? विदेशी फंडिंग के चौंकाने वाले खुलासे!

सितम्बर 19, 2026 (अंतिम अद्यतन: जुलाई 23, 2026) 1 मिनट पढ़ें
Protest, relief supplies, and food orders

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन ने एक नया मोड़ ले लिया है। जहां एक तरफ आंदोलनकारियों को हर संभव सुविधा मुहैया कराई जा रही है, वहीं इस आंदोलन की फंडिंग को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। डिलीवरी बॉय के चौंकाने वाले खुलासे ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि यह आंदोलन विदेशी मदद से संचालित किया जा रहा है ।

प्रदर्शन स्थल पर पिज्जा, बर्गर, समोसे और चाय के ढेर लग रहे हैं। ट्रकों पर कंबल, चादर, मैट और गद्दे आ रहे हैं । ऐसा लग रहा है जैसे किसान आंदोलन की तर्ज पर इस प्रदर्शन को लंबे समय तक चलाने की पूरी तैयारी है। लेकिन सवाल यह है कि इतना सारा सामान कौन भेज रहा है और इसका खर्च कौन उठा रहा है?

डिलीवरी बॉय ने किया चौंकाने वाला खुलासा
एक डिलीवरी बॉय ने बताया कि उसने अकेले एक दिन में CJP समर्थकों को 10 से ज्यादा ऑर्डर डिलीवर किए । हैरान करने वाली बात यह है कि ये सभी ऑर्डर जर्मनी, दुबई और सऊदी अरब जैसे देशों से फंड किए गए थे । यानी भारत में बैठे प्रदर्शनकारियों का खाना-पीना विदेशों में बैठे लोग भेज रहे हैं ।

जब डिलीवरी बॉय से पूछा गया कि खाना लेने वाला व्यक्ति भारतीय था या विदेशी, तो उसने पुष्टि की कि वे सभी भारतीय थे । यानी विदेशी पैसे से भारतीय युवाओं को प्रदर्शन के लिए उकसाया जा रहा है।

सिर्फ खाना ही नहीं, हर सुविधा मुफ्त
रिपोर्ट्स के अनुसार, देशभर और विदेशों से लोग प्रदर्शनकारियों के लिए खाना ऑर्डर कर रहे हैं। ऑर्डर का तरीका भी खास है – डिलीवरी बॉय को बिना किसी विशेष नाम के केवल “प्रदर्शन स्थल पर जो मिले उसे दे दो” कहा जाता है । एक डिलीवरी बॉय ने बताया कि अमेरिका से भी ऑर्डर आ रहे हैं । 80 पिज्जा, 34 बर्गर, 200 समोसे के ऑर्डर आम हो गए हैं । इतना खाना आ गया कि CJP को सोशल मीडिया पर लोगों से अपील करनी पड़ी कि अब और खाना न भेजें ।

यह स्पष्ट है कि इस आंदोलन को संचालित करने के लिए भारी मात्रा में संसाधन जुटाए गए हैं। पिछले रात प्रदर्शन स्थल पर कंबल, चादरें और गद्दे से भरा ट्रक पहुंचा, ताकि प्रदर्शनकारी दिल्ली में ही रुके रहें और आंदोलन जारी रख सकें ।

सवाल: किसकी है यह फंडिंग?
पहले भी BJP ने आरोप लगाया था कि CJP को विदेशी ताकतों से फंडिंग मिल रही है । CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस पर मजाक उड़ाते हुए कहा था कि उन्हें “सोरोस फंडिंग” से एक स्पीकर मिला है । लेकिन अब डिलीवरी बॉय के खुलासे के बाद यह मजाक सच साबित होता दिख रहा है।

सुरक्षा एजेंसियां भी CJP की फंडिंग और सोशल मीडिया पर इसकी तेजी से बढ़ती लोकप्रियता की जांच कर रही हैं । CJP के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स कुछ ही दिनों में 20 मिलियन से ज्यादा हो गए । एजेंसियों को संदेह है कि AI बॉट्स की मदद से फॉलोअर्स बढ़ाए गए हैं और पाकिस्तान से लिंक्ड सोशल मीडिया हैंडल भी इस प्रचार में सक्रिय हैं ।

क्या यह भारत की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप?
यह खुलासा भारत की संप्रभुता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जब विदेशी ताकतें भारत के आंतरिक मुद्दों पर युवाओं को उकसाने के लिए पैसे लगा रही हैं, तो यह चिंता का विषय है। क्या जर्मनी, दुबई, अमेरिका और सऊदी अरब में बैठे लोग भारत के शिक्षा मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन को फंड क्यों कर रहे हैं? क्या उन्हें भारत के आंतरिक मामलों में कोई दिलचस्पी है?

प्रदर्शनकारी जहां परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, वहीं विदेशी फंडिंग का यह पहलू इस मुद्दे को धूमिल कर रहा है। यह आंदोलन एक न्यायसंगत मांग से शुरू होकर अब एक अंतरराष्ट्रीय साजिश की तरफ बढ़ता दिख रहा है।

डिलीवरी बॉय का खुलासा CJP प्रदर्शन की विदेशी कनेक्शन की पुष्टि करता है । जब आंदोलन का खर्च विदेशी ताकतें उठा रही हैं, तो यह आंदोलन अपनी असली पहचान खो रहा है। भारतीय युवाओं को सतर्क रहने की जरूरत है – वे किसी विदेशी एजेंडे का हिस्सा तो नहीं बन रहे? सरकार और जांच एजेंसियों को इस पूरे मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए और देश को बताना चाहिए कि कौन से तत्व इस आंदोलन को फंड कर रहे हैं और क्यों।

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