टोक्यो/नई दिल्ली – जापानी येन लगातार गिरावट के रिकॉर्ड बना रहा है। यह मुद्रा 1986 के बाद पहली बार 163 येन प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गई है, जो चार दशकों का न्यूनतम स्तर है। ऐसे में जापान की वित्त मंत्री सात्सुकी काटायामा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकार विदेशी मुद्रा बाजार में किसी भी समय “निर्णायक कार्रवाई” करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बयान सिर्फ जापान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की वित्तीय व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत है। जब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अपनी मुद्रा बचाने के लिए ऐतिहासिक हस्तक्षेप कर रही है, तो इसके प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं—खासकर वैश्विक तरलता, अमेरिकी बॉन्ड बाजार, और डी-डॉलरीकरण (De-dollarization) की बहस पर।
येन इतना कमजोर क्यों?
येन की गिरावट के पीछे कई गहरे कारण हैं, जो इसे केवल एक अस्थायी उतार-चढ़ाव से कहीं अधिक बनाते हैं:
1. अमेरिका-जापान ब्याज दर का विशाल अंतर: बैंक ऑफ जापान (BOJ) ने हाल ही में ब्याज दर बढ़ाकर 1% कर दी है—जो 1995 के बाद का उच्चतम स्तर है—लेकिन यह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 3.50-3.75% की दर के मुकाबले अभी भी बहुत कम है। यह अंतर येन कैरी ट्रेड (येन में सस्ता कर्ज लेकर अन्य मुद्राओं में निवेश) को लगातार आकर्षक बनाए रखता है।
2. ऊर्जा आयात पर निर्भरता: जापान अपनी 90% ऊर्जा आयात करता है, जिसमें 95% मध्य पूर्व से आती है। ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जिससे जापान की आयात लागत आसमान छू रही है।
3. राजकोषीय अनिश्चितता: प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की 370 ट्रिलियन येन ($2.28 ट्रिलियन) की महत्वाकांक्षी निवेश योजना ने बाजारों को चिंतित कर दिया है, क्योंकि जापान का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात पहले ही 200% से अधिक है—जो दुनिया में सबसे अधिक है। इस अनिश्चितता ने 10-वर्षीय JGB यील्ड को 30 साल के उच्चतम स्तर 2.90% तक पहुंचा दिया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर?
1. ‘येन कैरी ट्रेड’ का अनवाइंड—एक वैश्विक तरलता संकट
यह सबसे बड़ा खतरा है। येन कैरी ट्रेड दशकों से वैश्विक बाजारों में तरलता का एक प्रमुख स्रोत रहा है। निवेशक जापान में लगभग शून्य ब्याज दर पर येन उधार लेकर दुनिया भर में—अमेरिकी ट्रेजरी से लेकर AI स्टॉक्स और उभरते बाजारों की इक्विटी तक—निवेश करते थे।
अगर BOJ तेजी से ब्याज दरें बढ़ाता है या जापानी सरकार बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप करके येन को मजबूत करती है, तो यह पूरा कारोबार बेमुनाफा हो जाएगा। नतीजतन, निवेशकों को अपनी पोजीशन बेचकर येन चुकाना पड़ेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक अच्छी तरह से समय पर किया गया हस्तक्षेप (खासकर अमेरिकी छुट्टी या एशियाई सत्र के दौरान) USD/JPY को कुछ ही दिनों में 10-15 येन तक उछाल सकता है—जो एक वैश्विक तरलता घटना (Global Liquidity Event) होगी। इसका असर होगा:
अमेरिकी शेयर बाजार पर दबाव: अनवाइंडिंग से S&P 500, Nasdaq और Dow Jones पर बिकवाली का भारी दबाव बनेगा, क्योंकि लीवरेज्ड पोजीशनों को कवर करने के लिए फंड्स को संपत्तियां बेचनी पड़ेंगी।
उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर संकट: डॉलर फंडिंग सख्त होने पर तुर्की, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों की मुद्राओं पर सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ेगा। जो देश हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं (जैसे दक्षिण अफ्रीका), वे इस झटके को पूरी तरह सोखेंगे।
2. अमेरिकी ट्रेजरी बाजार पर संकट
यह सबसे महत्वपूर्ण और कम समझा जाने वाला पहलू है। येन बचाने के लिए जापान को डॉलर खरीदने होंगे, जिसके लिए उसे अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड (US Treasuries) बेचने होंगे। जापान अमेरिकी कर्ज का सबसे बड़ा विदेशी धारक है, जिसके पास लगभग $1.2 ट्रिलियन अमेरिकी ट्रेजरी हैं।
बॉन्ड यील्ड में उछाल: अप्रैल-मई 2026 के बीच अकेले जापान ने लगभग 11.7 ट्रिलियन येन (लगभग $74 अरब) खर्च करके हस्तक्षेप किया। जब जापान ट्रेजरी बेचता है, तो अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ जाती है। TD Economics के अनुमान के अनुसार, इस गतिशीलता से अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड पर मध्यम अवधि में 20-50 बेसिस प्वाइंट का दबाव बन सकता है।
अमेरिकी वित्तीय स्थिरता पर जोखिम: अमेरिकी सरकार के लिए कर्ज पर ब्याज चुकाना पहले ही सालाना 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो चुका है। अगर जापान (और चीन) जैसे बड़े खरीदार ट्रेजरी बेचना जारी रखें, तो यह अमेरिकी सरकार के लिए एक गंभीर संकट पैदा कर सकता है।
3. Southeast Asia: येन की कमजोरी से फायदा
हर जगह नुकसान नहीं है। दक्षिण पूर्व एशियाई देश येन की गिरावट से लाभान्वित हो रहे हैं:
कम कर्ज लागत: मलेशिया, वियतनाम, इंडोनेशिया जैसे देशों पर येन-मूल्य वाले कर्ज (जैसे जापानी ODA लोन और सामुराई बॉन्ड) का बोझ कम हुआ है, क्योंकि स्थानीय मुद्राओं के मुकाबले येन कमजोर है।
जापानी निवेश में वृद्धि: जापानी कंपनियां अपने उत्पादन को Southeast Asia में स्थानांतरित कर रही हैं—वित्त वर्ष 2024 में जापान का offshore उत्पादन 36% से अधिक हो गया है।
पर्यटन और संपत्ति खरीद: सिंगापुर का GIC जैसे निवेशक टोक्यो और ओसाका में प्रीमियम होटल और कमर्शियल रियल एस्टेट खरीद रहे हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अगर येन अचानक मजबूत होता है तो ये सारे फायदे पलट सकते हैं।
डी-डॉलरीकरण (De-dollarization) को मिली नई गति
यह घटनाक्रम डी-डॉलरीकरण की बहस को एक नई दिशा देता है। डी-डॉलरीकरण का मतलब है दुनिया का डॉलर पर से अपनी निर्भरता कम करना। जापान का यह कदम इस दिशा में कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
1. अमेरिकी सहयोगियों में दरार: पहली बार, डी-डॉलरीकरण की बात सिर्फ रूस, ईरान, चीन तक सीमित नहीं रही। जापान—अमेरिका का करीबी सहयोगी—डॉलर के बिचौलिये से बचने के लिए भारत के साथ रुपये-येन में सीधा व्यापार शुरू करने की संभावना तलाश रहा है।
2. “साइलेंट करेंसी वॉर्स” (मौन मुद्रा युद्ध): 2026 में Japan, China, India सहित कई देश अपनी मुद्राओं को पहले से कहीं अधिक सक्रियता से प्रबंधित कर रहे हैं—चाहे वह प्रत्यक्ष हस्तक्षेप हो, पूंजी प्रवाह प्रतिबंध हो, या मौद्रिक नीति का समायोजन हो। इसका संचयी प्रभाव यह है कि विनिमय दरें अब आर्थिक संकेतों के रूप में कम काम कर रही हैं। जो देश हस्तक्षेप नहीं कर रहे (जैसे दक्षिण अफ्रीका), उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।
3. क्या डॉलर वाकई खत्म हो रहा है? यहां मतभेद है:
एक पक्ष: जापान का येन बचाव अभियान—जिसमें अमेरिकी ट्रेजरी बेचना शामिल है—डॉलर के “अत्यधिक विशेषाधिकार” (Exorbitant Privilege) पर सवाल उठाता है। जब डॉलर को ही अमेरिका अपनी वित्तीय स्थिरता के लिए कमजोर करने को मजबूर है, तो दुनिया को डॉलर पर भरोसा करना महंगा पड़ रहा है।
दूसरा पक्ष: ARK Invest की CEO कैथी वुड ने हाल ही में कहा कि डी-डॉलरीकरण की कहानी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। अप्रैल 2026 के Treasury International Capital आंकड़ों के अनुसार, विदेशी आधिकारिक संस्थान (सेंट्रल बैंक) $41.6 बिलियन के शुद्ध खरीदार थे—यानी वे डॉलर संपत्तियां नहीं बेच रहे। वुड का कहना है कि जापान की बिक्री मुद्रा बचाव के लिए थी, डॉलर से बाहर निकलने के लिए नहीं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही डॉलर का अंत अभी नहीं हुआ है, जापान का यह कदम “डी-डॉलरीकरण” की बहस को अब एक अकादमिक विषय से वैश्विक नीति की वास्तविकता में बदल रहा है।
संकट से बचाव के लिए कौन-से निवेश?
पोर्टफोलियो मैनेजर माइकल गेड के अनुसार, येन कैरी ट्रेड के अनवाइंड से उत्पन्न तरलता संकट में चार संपत्तियां सबसे अच्छा बचाव प्रदान कर सकती हैं: येन, सोना, तेल, और XRP (एक क्रिप्टोकरेंसी)।
सोना: पिछले 12 महीनों में SPDR Gold Shares ने 22.27% रिटर्न दिया है। कागजी मुद्राओं पर भरोसा कम होने पर निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर भागते हैं।
लॉन्ग-टर्म ट्रेजरी: गेड का मानना है कि नियामकों को अंततः “बॉन्ड बचाने के लिए स्टॉक क्रैश” करना पड़ सकता है—यानी लॉन्ग-टर्म ट्रेजरी सुरक्षित रहेंगे।
निष्कर्ष: क्या डॉलर का अंत शुरू हो गया?
यह केवल एक मुद्रा का उतार-चढ़ाव नहीं है; यह वैश्विक वित्तीय व्यवस्था (Global Financial System) के पुनर्गठन की शुरुआत हो सकती है।
जापान अमेरिकी ट्रेजरी बेचकर येन बचा रहा है, चीन अपनी होल्डिंग्स कम कर रहा है, और भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया जैसे देश वैकल्पिक भुगतान प्रणाली (Alternative Payment Systems) तलाश रहे हैं। हालांकि, अमेरिका के पास अभी भी कई हथियार हैं (जैसे टैरिफ, स्विफ्ट से बाहर करना, डॉलर की ग्लोबल रिजर्व स्थिति)।
जापान की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अकेले हस्तक्षेप—चाहे वह $74 बिलियन का ही क्यों न हो—येन की गिरावट को नहीं रोक सकता, जब तक कि अमेरिका-जापान ब्याज दर का अंतर कम न हो जाए। जैसा कि फ्रैंकलिन टेंपलटन की क्रिस्टी टैन ने कहा: “Intervention can slow a fall, punish speculative excess and signal official discomfort. But it cannot repeal arithmetic.” (हस्तक्षेप गिरावट को धीमा कर सकता है, अटकलों को दंडित कर सकता है, और असहमति का संकेत दे सकता है। लेकिन यह गणित को रद्द नहीं कर सकता।)
आने वाले सप्ताहों में Fed और BOJ दोनों की मौद्रिक नीति बैठकें इस दिशा तय करेंगी कि यह संकट कितना गहरा होगा।
