Skip to content
Bharatnama

Bharatnama

तेज़ भी, सटीक भी

Primary Menu
  • होम पेज
  • भारत
  • विदेश
  • भू-रणनीति
  • विशेष शृंखला
  • इतिहास
  • स्वास्थ्य
  • फ़ाइनेंस
  • खेल-कूद
  • मनोरंजन
Light/Dark Button
  • Home
  • भारत
  • पश्चिम बंगाल में बड़ा संवैधानिक फैसला, राज्यपाल आर एन रवि ने विधानसभा भंग की
  • भारत

पश्चिम बंगाल में बड़ा संवैधानिक फैसला, राज्यपाल आर एन रवि ने विधानसभा भंग की

June 1, 2026 (Last updated: May 7, 2026) 1 minute read
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने विधानसभा को किया भंग

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने विधानसभा को किया भंग

पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय एक बेहद असाधारण और संवेदनशील दौर से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अब तक अपने पद से इस्तीफ़ा नहीं दिया है, जबकि राज्यपाल R. N. Ravi ने गुरुवार को विधानसभा भंग करने की घोषणा कर दी। इस घटनाक्रम ने राज्य में संवैधानिक बहस और राजनीतिक टकराव को और तेज़ कर दिया है।

राज्यपाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 7 मई 2026 से पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया जाता है। इसके साथ ही राज्य की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो गया।

चुनाव नतीजों के बाद बढ़ा तनाव
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। पार्टी ने 207 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि तृणमूल कांग्रेस सिर्फ 80 सीटों तक सिमट गई। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ममता बनर्जी अपने गढ़ भवानीपुर सीट से बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी से 15 हज़ार से अधिक वोटों से हार गईं।

नतीजों के बाद आमतौर पर निवर्तमान मुख्यमंत्री इस्तीफ़ा देकर नई सरकार के गठन का रास्ता साफ़ करते हैं, लेकिन ममता बनर्जी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी हार “जनादेश से नहीं बल्कि साज़िश के जरिए” हुई है और इसलिए इस्तीफ़े का सवाल ही नहीं उठता।

क्या कहता है संविधान?
इस पूरे विवाद के बीच संविधान विशेषज्ञों और पूर्व चुनाव आयुक्तों की राय भी सामने आई है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने कहा कि ऐसी स्थिति बेहद दुर्लभ है और संविधान में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता।

उनके मुताबिक, जब किसी सरकार के पास विधानसभा का बहुमत नहीं रह जाता, तब मुख्यमंत्री नैतिक और संवैधानिक रूप से पद पर बने नहीं रह सकते। हालांकि, विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने तक उन्हें जबरन हटाना आसान नहीं होता।

कुरैशी ने यह भी कहा कि यदि संवैधानिक संकट गहराता, तो राज्यपाल अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते थे। हालांकि अब विधानसभा भंग हो चुकी है, इसलिए नई सरकार के गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग

“यह प्रतीकात्मक विरोध है”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का इस्तीफ़ा न देना एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है। कोलकाता के जेवियर कॉलेज के प्रोफेसर और ‘बैटलग्राउंड बंगाल’ के लेखक सायंतन घोष का कहना है कि ममता की राजनीति हमेशा संघर्ष और विरोध की शैली पर आधारित रही है।

उनके अनुसार, ममता यह दिखाना चाहती हैं कि चुनाव निष्पक्ष नहीं था और वह इस नतीजे को कानूनी चुनौती भी दे सकती हैं। हालांकि संवैधानिक रूप से उनके इस कदम का कोई बड़ा असर नहीं पड़ने वाला।

क्या राज्यपाल मुख्यमंत्री को हटा सकते हैं?
संविधान के अनुच्छेद 164(1) में कहा गया है कि मुख्यमंत्री और मंत्री “राज्यपाल की इच्छा” तक पद पर बने रहते हैं। लेकिन संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मतलब यह नहीं कि राज्यपाल मनमाने तरीके से मुख्यमंत्री को हटा सकते हैं।

प्रसिद्ध विधि विशेषज्ञ फैजान मुस्तफा का कहना है कि भारतीय लोकतंत्र में असली आधार विधानसभा का बहुमत होता है। यदि मुख्यमंत्री सदन का विश्वास खो दें, तो उनका पद पर बने रहना व्यावहारिक नहीं माना जाता।

बीजेपी ने क्या कहा?
बीजेपी ने ममता बनर्जी के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे “संवैधानिक ईशनिंदा” बताया। उनका कहना है कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं और संविधान की भावना के खिलाफ है।

बीजेपी के अनुसार नई सरकार शनिवार को शपथ ले सकती है और पार्टी पहली बार पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने जा रही है।

विपक्ष ममता के समर्थन में
दूसरी ओर विपक्षी दलों के कई नेता ममता बनर्जी के समर्थन में उतर आए हैं। संजय राउत ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रहा है।

वहीं अखिलेश यादव गुरुवार को कोलकाता पहुंचे और ममता बनर्जी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव में “बेईमानी” हुई है और विपक्ष को इस मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए।

अब आगे क्या?
विधानसभा भंग होने के बाद अब संवैधानिक रूप से पुरानी सरकार का कार्यकाल समाप्त माना जाएगा। इसके बाद राज्यपाल नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया शुरू करेंगे, जिसमें नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी और नई सरकार का गठन होगा।

हालांकि राजनीतिक तौर पर यह मामला यहीं खत्म होता नहीं दिख रहा। ममता बनर्जी आने वाले दिनों में चुनाव नतीजों को अदालत में चुनौती दे सकती हैं और बीजेपी के खिलाफ बड़ा राजनीतिक अभियान भी छेड़ सकती हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं, संवैधानिक मर्यादाओं और राजनीतिक संघर्ष की नई कहानी बनता जा रहा है।

Tags: अखिलेश यादव आर एन रवि टीएमसी पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल राजनीति पश्चिम बंगाल विधानसभा बंगाल चुनाव 2026 बंगाल न्यूज बीजेपी बीजेपी सरकार ममता बनर्जी राष्ट्रपति शासन शुभेंदु अधिकारी संबित पात्रा संविधान

Post navigation

Previous: शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या, बीजेपी ने बताया ‘सुनियोजित साज़िश’
Next: विजय के विधायकों की सीधी चेतावनी: DMK-AIADMK ने मिलकर बनाई सरकार तो TVK के सभी विधायक देंगे इस्तीफा

Related Stories

भारत का डिजिटल रुपया और वैश्विक भुगतान
  • फ़ाइनेंस
  • भारत

RBI का बड़ा कदम: अब डिजिटल रुपया करेगा देशों के बीच लेनदेन, क्या बदल जाएगी अंतरराष्ट्रीय भुगतान की दुनिया?

June 1, 2026
नाम और जातिवाद पहचान का सवाल
  • इतिहास
  • भारत

सरनेम और जातिवाद: क्या उपनाम हटाने से बदल सकता है भारत का सामाजिक ढांचा?

June 1, 2026
Border security crackdown in focus
  • भारत

अमित शाह का बड़ा बॉर्डर एक्शन: सीमा से 15 किमी तक अवैध ढांचों पर कार्रवाई, फर्जी नेटवर्क और तस्करी पर शिकंजा

June 1, 2026

Archives

  • May 2026
  • April 2026

Categories

  • इतिहास
  • खेल-कूद
  • फ़ाइनेंस
  • भारत
  • भू-रणनीति
  • मनोरंजन
  • विदेश
  • विशेष शृंखला
  • व्यापार
  • स्वास्थ्य

You May Have Missed

भारत का डिजिटल रुपया और वैश्विक भुगतान
  • फ़ाइनेंस
  • भारत

RBI का बड़ा कदम: अब डिजिटल रुपया करेगा देशों के बीच लेनदेन, क्या बदल जाएगी अंतरराष्ट्रीय भुगतान की दुनिया?

June 1, 2026
Time to physically audit Fort Knox
  • फ़ाइनेंस
  • भू-रणनीति
  • विदेश

क्या अब फोर्ट नॉक्स का भौतिक ऑडिट होना चाहिए? अमेरिका के स्वर्ण भंडार को लेकर फिर उठे सवाल

June 1, 2026
सोने और मुद्राओं का अवमूल्यन
  • फ़ाइनेंस
  • भू-रणनीति

सोने के मुकाबले दुनिया की बड़ी मुद्राओं का अवमूल्यन: रुपये से डॉलर तक कितना कमजोर हुआ पैसा?

June 1, 2026
नाम और जातिवाद पहचान का सवाल
  • इतिहास
  • भारत

सरनेम और जातिवाद: क्या उपनाम हटाने से बदल सकता है भारत का सामाजिक ढांचा?

June 1, 2026
  • About
  • Contact us
  • Privacy Policy
Bharatnama Copyright © 2026 All rights reserved. | ReviewNews by AF themes.
English
Hindi