मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की घोषणा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद शुभेंदु अधिकारी को राज्य का नया मुख्यमंत्री चुन लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में बीजेपी विधायक दल की बैठक के बाद उनके नाम का औपचारिक एलान किया।
बीजेपी ने इस चुनाव में 207 सीटें जीतकर ममता बनर्जी की 15 साल पुरानी सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया है। लंबे समय से बंगाल में सत्ता में आने का सपना देख रही बीजेपी के लिए यह जीत बेहद अहम मानी जा रही है।
अमित शाह ने कैसे किया एलान?
कोलकाता में बीजेपी विधायक दल की बैठक के बाद अमित शाह ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष की ओर से उन्हें और मोहन चरण माझी को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था। बैठक में विधायक दल के नेता के लिए कई प्रस्ताव आए, लेकिन सभी प्रस्ताव केवल शुभेंदु अधिकारी के नाम पर ही थे।
अमित शाह ने कहा,
“मैं केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में शुभेंदु अधिकारी जी को पश्चिम बंगाल विधान मंडल दल का नेता निर्वाचित घोषित करता हूं।”
इसके साथ ही साफ हो गया कि बंगाल में बीजेपी सरकार की कमान अब शुभेंदु अधिकारी संभालेंगे।
बीजेपी की जीत में शुभेंदु की बड़ी भूमिका
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की इस बड़ी जीत के पीछे शुभेंदु अधिकारी की रणनीति और ज़मीनी पकड़ का बड़ा योगदान है।
2021 के विधानसभा चुनाव से पहले शुभेंदु ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। उस समय इसे बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना गया था। बीजेपी में आने के कुछ ही महीनों के भीतर उन्होंने पार्टी को तीन सीटों से 77 सीटों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
अब पांच साल बाद बीजेपी ने बंगाल में सत्ता हासिल कर ली है और इसका बड़ा श्रेय शुभेंदु अधिकारी को दिया जा रहा है।

कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी थे शुभेंदु
एक समय ऐसा था जब शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी के बाद टीएमसी का सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था। 2016 में नंदीग्राम से विधायक बनने के बाद उन्हें परिवहन मंत्री बनाया गया था और सरकार में उनका कद लगातार बढ़ता गया।
लेकिन धीरे-धीरे पार्टी में अभिषेक बनर्जी का प्रभाव बढ़ने लगा और शुभेंदु खुद को अलग-थलग महसूस करने लगे। आखिरकार दिसंबर 2020 में उन्होंने टीएमसी छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए।
इसके बाद 2021 के चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर ममता banerjee को हराकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान बनाई।
विपक्ष के नेता से मुख्यमंत्री तक का सफर
2021 में बीजेपी की हार के बावजूद शुभेंदु अधिकारी को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया गया था। पिछले पांच वर्षों में उन्होंने लगातार राज्य सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया।
उन्होंने बंगाल के कई इलाकों में बीजेपी का संगठन मजबूत किया और उन क्षेत्रों में भी पार्टी की पकड़ बढ़ाई जिन्हें पहले टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी नेतृत्व को बंगाल में ऐसा चेहरा चाहिए था जिसकी जमीनी पकड़ मजबूत हो और जो राज्य की राजनीति को करीब से समझता हो। शुभेंदु अधिकारी इस भूमिका में पूरी तरह फिट बैठे।
नंदीग्राम आंदोलन से मिली बड़ी पहचान
शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। लेकिन उन्हें असली पहचान 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से मिली।
तत्कालीन वाममोर्चा सरकार के खिलाफ भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। राजनीतिक विश्लेषक उन्हें उस आंदोलन का मुख्य आर्किटेक्ट भी मानते हैं।
नंदीग्राम आंदोलन ने न सिर्फ बंगाल की राजनीति बदल दी, बल्कि शुभेंदु अधिकारी को राज्य का बड़ा नेता भी बना दिया।
बीजेपी के लिए ऐतिहासिक पल
बीजेपी लंबे समय से बंगाल में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने पिछले कई वर्षों में राज्य में लगातार चुनावी अभियान चलाया।
अब पहली बार बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई है। इसे पार्टी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
अब सबकी नजर नई सरकार पर
शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब लोगों की नजर उनकी नई सरकार पर है। बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।
ऐसे में अब देखना होगा कि नई सरकार बंगाल में किस तरह की नीतियां लागू करती है और राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
