गूगल का भारत में बड़े निवेश का प्लान।
भारत तेजी से दुनिया के सबसे बड़े टेक और AI हब के रूप में उभर रहा है। इसी दिशा में अब टेक दिग्गज गूगल ने भी बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। कंपनी भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्वर और ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में भारी निवेश की संभावनाएं तलाश रही है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।
नई दिल्ली में गूगल अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि कंपनी भारत में AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि यह निवेश करोड़ों रुपये का हो सकता है और इससे भारत के टेक सेक्टर को नई गति मिलेगी।
AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने हाल ही में कंपनी के पूंजीगत व्यय (Capex) में 185 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। इस बजट का बड़ा हिस्सा AI इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लाउड टेक्नोलॉजी के विस्तार पर खर्च किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में डेटा सेंटर, GPU सर्वर और AI रिसर्च इकोसिस्टम के विकास से देश डिजिटल अर्थव्यवस्था में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
विशाखापत्तनम में बनेगा AI हब
गूगल ने हाल ही में विशाखापत्तनम में लगभग 15 अरब डॉलर (करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये) के निवेश की योजना का ऐलान किया था। इस परियोजना के तहत भारत का पहला गीगावाट-स्केल AI हब विकसित किया जाएगा।
इस मेगा प्रोजेक्ट में तीन बड़े डेटा सेंटर कैंपस बनाए जाएंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने करीब 600 एकड़ जमीन आवंटित की है। यह हब भविष्य में AI आधारित क्लाउड सेवाओं, मशीन लर्निंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

अडानी और एयरटेल के साथ साझेदारी
यह परियोजना AdaniConneX और Nxtra by Airtel के सहयोग से विकसित की जा रही है। दोनों कंपनियां भारत में डेटा सेंटर और डिजिटल नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में तेजी से काम कर रही हैं।
अप्रैल 2026 में आयोजित ‘Google Cloud Next’ समिट में सुंदर पिचाई ने कहा था कि कंपनी के मशीन लर्निंग संसाधनों का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा क्लाउड बिजनेस के लिए समर्पित रहेगा। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि गूगल AI आधारित सेवाओं को भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी दिशा मान रहा है।
भारत बनेगा ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब
कार्यक्रम के दौरान अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में दुनिया का भरोसेमंद सप्लाई चेन पार्टनर बनकर उभर रहा है। उन्होंने वैश्विक टेक कंपनियों से अपील की कि वे अपने सर्वर, GPU और चिप्स का निर्माण भारत में करें।
सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और सेमीकंडक्टर नीति के चलते कई वैश्विक कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। गूगल का यह कदम भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भारत के डिजिटल भविष्य को मिलेगा बड़ा सहारा
थॉमस कुरियन ने इस परियोजना को भारत के AI-आधारित भविष्य के लिए “टर्निंग पॉइंट” बताया। वहीं गूगल क्लाउड ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर के उपाध्यक्ष बिकाश कोले ने कहा कि यह AI हब भारत के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और वैश्विक AI अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है तो भारत एशिया में AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे लाखों रोजगार के अवसर भी पैदा होने की संभावना है।
