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शी जिनपिंग के ‘ढलते अमेरिका’ वाले बयान पर ट्रंप का पलटवार, बोले- बाइडन काल में था अमेरिका कमजोर

जुलाई 16, 2026 (अंतिम अद्यतन: मई 15, 2026) 1 मिनट पढ़ें
ट्रंप बनाम शी

ट्रंप बनाम शी

डोनाल्ड ट्रम्प और शी जिनपिंग के बीच जारी कूटनीतिक और राजनीतिक बयानबाज़ी एक बार फिर चर्चा में है। चीन दौरे पर पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस पुराने बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें अमेरिका को “Declining Nation” यानी “ढलता हुआ देश” बताया गया था।

ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए कहा कि शी जिनपिंग का इशारा मौजूदा अमेरिकी प्रशासन की ओर नहीं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल की तरफ था। ट्रंप ने दावा किया कि बाइडन सरकार के दौरान अमेरिका को आर्थिक, सामरिक और सामाजिक स्तर पर भारी नुकसान उठाना पड़ा।

उन्होंने अपने पोस्ट में खुली सीमाओं, बढ़ते अपराध, ऊंचे टैक्स और व्यापार समझौतों को लेकर पिछली सरकार की आलोचना की। ट्रंप के अनुसार, उनके नेतृत्व में पिछले 16 महीनों के दौरान अमेरिका ने तेज़ आर्थिक और सैन्य प्रगति हासिल की है। उन्होंने शेयर बाज़ार में रिकॉर्ड उछाल, मज़बूत रोजगार आंकड़ों और विदेशी निवेश में बढ़ोतरी को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।

ट्रंप ने दावा किया कि दुनिया भर से लगभग 18 ट्रिलियन डॉलर का निवेश अमेरिका की ओर आ रहा है और देश का जॉब मार्केट “इतिहास का सबसे मजबूत” बन चुका है। उन्होंने ईरान और वेनेज़ुएला से जुड़े अमेरिकी अभियानों और विदेश नीति का भी उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका अब फिर से वैश्विक ताकत के रूप में उभर रहा है।

अपने पोस्ट में ट्रंप ने यह भी कहा कि शी जिनपिंग ने उनकी सरकार की उपलब्धियों की सराहना की है। ट्रंप ने लिखा, “दो साल पहले अमेरिका वास्तव में ढलान पर था और इस बात पर मैं शी जिनपिंग से सहमत हूं। लेकिन अब अमेरिका दुनिया का सबसे चर्चित और शक्तिशाली देश बन गया है।”

हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ट्रंप की मौजूदा चीन यात्रा के दौरान शी जिनपिंग ने प्रत्यक्ष रूप से ऐसा कोई बयान दिया है या नहीं। लेकिन गुरुवार को अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने “थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” (Thucydides Trap) का ज़िक्र जरूर किया था।

उन्होंने कहा, “दुनिया एक नए मोड़ पर खड़ी है। क्या चीन और अमेरिका ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ से बाहर निकलकर संबंधों का नया मॉडल बना सकते हैं?”

यह सिद्धांत बताता है कि जब कोई उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित वैश्विक शक्ति को चुनौती देती है, तो दोनों देशों के बीच संघर्ष या युद्ध की संभावना बढ़ जाती है। इस अवधारणा को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ग्राहम एलिसन ने लोकप्रिय बनाया था। यह नाम प्राचीन यूनानी इतिहासकार थूसाईंडाईड्स के विचारों पर आधारित है, जिन्होंने एथेंस और स्पार्टा के बीच हुए पेलोपोनेशियन युद्ध का विश्लेषण करते हुए कहा था कि उभरती शक्ति का भय अक्सर बड़े युद्धों को जन्म देता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप और शी जिनपिंग के हालिया बयान ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक, सैन्य प्रभाव और वैश्विक नेतृत्व को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। दोनों देशों के रिश्ते भविष्य की वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं।

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