भारत की विदेश नीति और रक्षा रणनीति में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दक्षिण एशिया तक सीमित रहने के बजाय भारत अब यूरोप, भूमध्यसागर और पश्चिम एशिया के क्षेत्रों में भी अपनी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ा रहा है। इसी क्रम में भारत ने आर्मेनिया, ग्रीस और साइप्रस जैसे देशों के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत किया है, जिन्हें तुर्की के क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी माना जाता है।
हाल ही में तुर्की के विदेश मंत्री द्वारा भारत के साथ मजबूत और सकारात्मक संबंधों की इच्छा जताए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकार इस बदलाव को नए भू-राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।
आर्मेनिया के साथ बढ़ा रक्षा सहयोग
भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारत ने आर्मेनिया को स्वदेशी हथियार प्रणालियों, रॉकेट लॉन्चर और मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति की है। दक्षिण काकेशस क्षेत्र में भारत की यह सक्रियता रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्मेनिया के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी केवल रक्षा निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय संतुलन बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है।
ग्रीस और साइप्रस के साथ भी मजबूत हुए रिश्ते
भारत ने हाल के वर्षों में ग्रीस और साइप्रस के साथ भी राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों को नई गति दी है। प्रधानमंत्री स्तर की यात्राओं और उच्च स्तरीय वार्ताओं के माध्यम से दोनों पक्षों ने सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दिखाई है।
पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में ग्रीस और साइप्रस लंबे समय से तुर्की के साथ विभिन्न मुद्दों पर मतभेद रखते रहे हैं। ऐसे में भारत का इन देशों के साथ बढ़ता सहयोग अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
तुर्की क्यों चाहता है भारत से बेहतर संबंध?
तुर्की और भारत के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। कश्मीर मुद्दे पर तुर्की की टिप्पणियों के कारण दोनों देशों के बीच कुछ तनाव भी रहा।
हालांकि बदलते वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक परिदृश्य में तुर्की अब भारत के महत्व को नजरअंदाज नहीं कर सकता। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत न केवल एक विशाल बाजार है, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी उसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि तुर्की भारत के साथ आर्थिक, व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करके दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों को कम करना चाहता है।
पूर्वी भूमध्यसागर में भारत की बढ़ती मौजूदगी
विशेषज्ञों के अनुसार आर्मेनिया, ग्रीस और साइप्रस के साथ भारत का सहयोग पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में उसकी पहली बड़ी रणनीतिक उपस्थिति के रूप में देखा जा सकता है।
यह क्षेत्र यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक केंद्र है। यहां बढ़ती भारतीय सक्रियता यह संकेत देती है कि नई दिल्ली अब वैश्विक स्तर पर अपने रणनीतिक हितों को अधिक व्यापक रूप से परिभाषित कर रही है।
क्या बदल रहे हैं वैश्विक शक्ति संतुलन?
भारत की विदेश नीति अब “मल्टी-अलाइनमेंट” यानी विभिन्न देशों के साथ समानांतर संबंध विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अमेरिका, रूस, यूरोप, पश्चिम एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखते हुए भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहा है।
आर्मेनिया, ग्रीस और साइप्रस के साथ बढ़ते संबंधों तथा तुर्की द्वारा बेहतर रिश्तों की इच्छा जताने को इसी व्यापक रणनीतिक बदलाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और रणनीतिक पहुंच ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण पैदा किए हैं। पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में भारत की सक्रियता और तुर्की द्वारा संबंध सुधारने की इच्छा यह दर्शाती है कि नई दिल्ली अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने वाली महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभर रही है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत, तुर्की और उनके क्षेत्रीय साझेदारों के बीच ये नए संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
