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पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सियासी घमासान तेज, चुनाव आयोग का बड़ा कदम; सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर TMC-BJP आमने-सामने

October 15, 2026 (Last updated: May 2, 2026) 1 minute read
राजनीतिक हलचल पश्चिम बंगाल चुनाव 2026

राजनीतिक हलचल पश्चिम बंगाल चुनाव 2026

कोलकाता | 2 मई 2026
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। वोटों की गिनती 4 मई को होनी है, लेकिन उससे पहले ही राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी लड़ाई ने इस चुनाव को और भी संवेदनशील बना दिया है। इस बीच चुनाव आयोग ने पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए राज्य में अतिरिक्त ऑब्ज़र्वर तैनात करने की घोषणा की है।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
मतगणना में केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सुपरवाइज़र बनाए जाने के मुद्दे पर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा।
तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि इससे निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह अपने सर्कुलर का पूरी तरह पालन करेगा और मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखी जाएगी। अदालत ने आयोग के आश्वासन को रिकॉर्ड में लेते हुए मामले में कोई अतिरिक्त आदेश देने से इनकार कर दिया।

फैसले की अलग-अलग व्याख्या
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद सियासी बयानबाज़ी और तेज हो गई है।
ममता बनर्जी की पार्टी TMC इसे अपनी जीत बता रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी इसे TMC की हार के रूप में पेश कर रही है।

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने स्पष्ट किया कि यह कहना गलत है कि TMC की याचिका खारिज कर दी गई है। वहीं बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला संवैधानिक रूप से सही है और इससे TMC के आरोपों की हवा निकल गई है।

बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि टीएमसी ने बिना ठोस आधार के आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

चुनाव आयोग का अहम फैसला
राज्य में बढ़ते तनाव को देखते हुए चुनाव आयोग ने 165 अतिरिक्त काउंटिंग ऑब्ज़र्वर और 77 पुलिस ऑब्ज़र्वर नियुक्त करने का फैसला लिया है।
ये ऑब्ज़र्वर खासतौर पर उन विधानसभा सीटों पर तैनात किए जाएंगे जहां एक से अधिक काउंटिंग हॉल हैं।

आयोग के अनुसार:

  • काउंटिंग ऑब्ज़र्वर पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे
  • पुलिस ऑब्ज़र्वर कानून-व्यवस्था पर नजर रखेंगे
  • सभी अधिकारी आयोग के नियंत्रण में काम करेंगे

यह कदम मतगणना को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

राजनीतिक दावे और रणनीति
मतदान खत्म होने के बाद अब सभी दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।
TMC का दावा है कि वह 294 में से 200 से अधिक सीटें जीत सकती है। पार्टी नेता कुणाल घोष ने यहां तक कहा कि विपक्षी दल के पास खुद केवल 78 सीटों पर जीत की संभावना है।

वहीं बीजेपी नेताओं ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि TMC सिर्फ अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश कर रही है और इस बार सत्ता परिवर्तन तय है।

क्यों अहम है बंगाल की मतगणना?
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के नतीजे न केवल राज्य की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं। यही वजह है कि इस बार बंगाल पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

क्या आगे होगा?
4 मई को होने वाली मतगणना के दिन सुरक्षा और पारदर्शिता सबसे बड़ी चुनौती होगी। चुनाव आयोग की अतिरिक्त तैनाती और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के बीच अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नतीजे किसके पक्ष में जाते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल का चुनाव सिर्फ वोटों की लड़ाई नहीं, बल्कि भरोसे, पारदर्शिता और राजनीतिक वर्चस्व की भी जंग बन चुका है।

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