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गरिंचा: फुटबॉल का वह जादूगर जिसने पेले की चमक को भी चुनौती दी, लेकिन शराब ने छीन लिया उसका साम्राज्य

जुलाई 25, 2026 (अंतिम अद्यतन: जून 5, 2026) 1 मिनट पढ़ें
Garrincha The magician of football

दुनिया का सबसे महान ड्रिब्लर जिसकी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं
फुटबॉल के इतिहास में जब भी महान खिलाड़ियों की चर्चा होती है तो सबसे पहले पेले, डिएगो माराडोना, लियोनेल मेसी, जोहान क्रूफ और रोनाल्डिन्हो जैसे नाम सामने आते हैं। लेकिन एक ऐसा खिलाड़ी भी था जिसे उसके दौर में कई लोग पेले से भी बड़ा फुटबॉलर मानते थे। उसका नाम था मैनुएल फ्रांसिस्को डॉस सैंटोस, जिसे दुनिया गरिंचा के नाम से जानती है।

गरिंचा सिर्फ एक फुटबॉलर नहीं थे, बल्कि फुटबॉल मैदान पर चलने वाला जादू थे। उनकी ड्रिब्लिंग इतनी अद्भुत थी कि विरोधी खिलाड़ी गेंद छीनने के लिए दौड़ते रह जाते थे और दर्शक हंसते-हंसते तालियां बजाने लगते थे। यही कारण था कि उन्हें “पीपुल्स जॉय” यानी जनता की खुशी कहा जाता था।

लेकिन जितनी शानदार उनकी सफलता की कहानी थी, उतना ही दर्दनाक उनका अंत भी था। गरीबी से निकलकर विश्व विजेता बनने वाले इस खिलाड़ी को अंततः शराब की लत ने निगल लिया।

जन्म से ही चुनौतियों से भरा जीवन
गरिंचा का जन्म 28 अक्टूबर 1933 को ब्राज़ील के रियो डी जेनेरियो के पास एक बेहद गरीब इलाके में हुआ था। बचपन से ही उनके पैरों में गंभीर शारीरिक समस्याएं थीं।

उनका दायां पैर बाएं पैर से लगभग छह सेंटीमीटर छोटा था। बायां पैर अंदर की ओर मुड़ा हुआ था और रीढ़ की संरचना भी सामान्य नहीं थी। डॉक्टरों का मानना था कि वह कभी अच्छा एथलीट नहीं बन पाएंगे।

लेकिन यही शारीरिक असंतुलन बाद में उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। उनके दौड़ने और मुड़ने का अंदाज इतना असामान्य था कि विरोधी खिलाड़ी उनके अगले कदम का अनुमान ही नहीं लगा पाते थे।

फैक्ट्री मजदूर से फुटबॉल स्टार तक का सफर
गरीबी के कारण गरिंचा ने मात्र 14 वर्ष की उम्र में एक कपड़ा मिल में काम करना शुरू कर दिया। वह नौकरी में खास दिलचस्पी नहीं लेते थे, लेकिन फैक्ट्री की फुटबॉल टीम के सबसे बड़े स्टार थे।

उनकी प्रतिभा पर पहली बार गंभीरता से नजर ब्राज़ील के महान डिफेंडर निल्टन सैंटोस की पड़ी। उन्होंने गरिंचा को प्रसिद्ध क्लब बोटोफोगो में खेलने का अवसर दिलाया।

साल 1953 में बोटोफोगो के लिए अपने पहले ही मैच में गरिंचा ने हैट्रिक लगाकर सबको चौंका दिया। इसके बाद पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी।

1958 विश्व कप: जब दुनिया ने पहली बार देखा जादू
1958 फीफा विश्व कप में दुनिया ने पहली बार गरिंचा और पेले की जोड़ी को एक साथ खेलते देखा। यह वही टूर्नामेंट था जिसमें ब्राज़ील ने पहली बार विश्व कप जीता।

दिलचस्प बात यह है कि विश्व कप से पहले हुए मानसिक परीक्षण में गरिंचा और पेले दोनों ही सफल नहीं हुए थे। विशेषज्ञों को लगता था कि वे बड़े मंच का दबाव नहीं झेल पाएंगे।

लेकिन मैदान पर उन्होंने सभी विशेषज्ञों को गलत साबित कर दिया।

पेले ने बाद में अपनी आत्मकथा में लिखा कि गरिंचा सिर्फ महान खिलाड़ी नहीं बल्कि बेहद नेक इंसान भी थे। 1958 विश्व कप फाइनल के बाद जब पेले थकान के कारण मैदान पर गिर गए थे, तब सबसे पहले मदद के लिए गरिंचा ही पहुंचे थे।

पेले और गरिंचा: अजेय जोड़ी
फुटबॉल इतिहास में शायद ही कोई जोड़ी इतनी सफल रही हो।

जब भी पेले और गरिंचा एक साथ मैदान पर उतरे, ब्राज़ील कभी नहीं हारा। दोनों ने साथ मिलकर 40 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, जिनमें ब्राज़ील ने 36 जीते और 4 ड्रॉ खेले।

एक भी हार नहीं।

यही कारण है कि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि पेले और गरिंचा की जोड़ी फुटबॉल इतिहास की सबसे सफल साझेदारी थी।

1962 विश्व कप: जब गरिंचा अकेले बने ब्राज़ील के नायक
1962 विश्व कप में पेले शुरुआती मैचों में ही चोटिल होकर बाहर हो गए। अधिकांश लोगों को लगा कि अब ब्राज़ील का खिताब बचाना असंभव है।

लेकिन इसके बाद गरिंचा ने वह प्रदर्शन किया जो आज भी विश्व कप इतिहास के महानतम व्यक्तिगत प्रदर्शनों में गिना जाता है।

उन्होंने इंग्लैंड और मेजबान चिली के खिलाफ निर्णायक मुकाबलों में शानदार गोल किए और टीम को फाइनल तक पहुंचाया।

सेमीफाइनल में चिली के खिलाफ उन्होंने दो गोल दागे और एक अन्य गोल में अहम भूमिका निभाई। फाइनल में तेज बुखार होने के बावजूद वे मैदान पर उतरे और ब्राज़ील लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बना।

कई फुटबॉल इतिहासकार मानते हैं कि 1962 का विश्व कप लगभग अकेले दम पर गरिंचा ने जिताया था।

मैदान का जादूगर, निजी जिंदगी का भटका हुआ सितारा
जहां मैदान पर गरिंचा लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाते थे, वहीं निजी जीवन में वह लगातार संघर्ष कर रहे थे।

उनके पिता शराब के आदी थे और यही आदत धीरे-धीरे गरिंचा में भी आ गई। सफलता और प्रसिद्धि मिलने के बाद उनकी शराब की लत और बढ़ती गई।

नशे की हालत में कार चलाने के कारण कई हादसे हुए। निजी जीवन में भी उनका जीवन विवादों से घिरा रहा। विभिन्न रिश्तों से उनके 14 बच्चों की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आई।

उनकी दो शादियां हुईं, लेकिन दोनों का अंत तलाक में हुआ।

पेले बने वैश्विक ब्रांड, गरिंचा रह गए आम जनता के नायक
पेले और गरिंचा के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके करियर प्रबंधन का था।

पेले ने पेशेवर मैनेजर रखे, ब्रांड बनाए और अपने करियर को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया। दूसरी ओर गरिंचा को कभी अपने आर्थिक और व्यावसायिक हितों की चिंता नहीं रही।

वे सूट-बूट, कारोबारी बैठकों और राजनीतिक संपर्कों से दूर रहे। उनकी दुनिया फुटबॉल, सांबा संगीत, दोस्तों और शराब तक सीमित रही।

यही वजह रही कि मैदान पर समान या कई बार अधिक प्रतिभाशाली होने के बावजूद उन्हें वैश्विक पहचान और आर्थिक सफलता उतनी नहीं मिली जितनी पेले को मिली।

दुखद अंत
लगातार शराब पीने के कारण गरिंचा का स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ता गया। आखिरकार जनवरी 1983 में मात्र 49 वर्ष की आयु में लिवर सिरोसिस के कारण उनका निधन हो गया।

उनकी मृत्यु के समय आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं थी।

लेकिन जब उनका अंतिम संस्कार हुआ, तब हजारों लोग उन्हें विदाई देने पहुंचे। सड़कों पर उमड़ी भीड़ यह साबित कर रही थी कि ब्राज़ील की जनता ने अपने सबसे प्रिय फुटबॉल नायक को कभी नहीं भुलाया।

विरासत जो आज भी जीवित है
आज जब दुनिया मेसी, नेमार या रोनाल्डिन्हो की ड्रिब्लिंग की बात करती है, तब फुटबॉल इतिहास के जानकार गरिंचा को याद करते हैं।

वह खिलाड़ी जिसने शारीरिक कमियों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। जिसने दो विश्व कप जीतने में अहम भूमिका निभाई। जिसने पेले जैसे महान खिलाड़ी को भी अपना सबसे बेहतरीन साथी कहा जाने पर मजबूर कर दिया।

गरिंचा की कहानी केवल फुटबॉल की कहानी नहीं है। यह प्रतिभा, संघर्ष, सफलता, गलतियों और इंसानी कमजोरियों की कहानी है।

शायद यही वजह है कि उनकी मृत्यु के चार दशक बाद भी दुनिया उन्हें सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि फुटबॉल के सबसे बड़े कलाकारों में से एक मानती है।

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