दांबुला: भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी इन दिनों अपने खेल से अधिक मैदान पर हुई एक विवादित घटना को लेकर चर्चा में हैं। भारत-ए और श्रीलंका-ए के बीच खेले गए रोमांचक मुकाबले के बाद वैभव सूर्यवंशी और श्रीलंकाई खिलाड़ी विशेन हलाम्बागे के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की देखने को मिली, जिसने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि इस पूरे विवाद में गलती किसकी थी और आईसीसी के नियम इस मामले में क्या कहते हैं।
रोमांचक मुकाबले के बाद बढ़ा तनाव
दांबुला में खेले गए इस मुकाबले में भारत-ए ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 49.2 ओवर में 265 रन बनाए। जवाब में श्रीलंका-ए ने भी निर्धारित 50 ओवर में 265 रन बनाकर मैच टाई कर दिया।
मैच का फैसला सुपर ओवर से हुआ, जिसमें श्रीलंका-ए ने 16 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम केवल 9 रन ही बना सकी और मुकाबला हार गई।
हार के बाद मैदान पर माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसी दौरान भारत के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और श्रीलंका के विशेन हलाम्बागे के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए श्रीलंका-ए के विकेटकीपर निरोशन डिकवेला को बीच-बचाव करना पड़ा।
आईसीसी के नियम क्या कहते हैं?
आईसीसी के कोड ऑफ कंडक्ट के अनुच्छेद 2.12 के अनुसार किसी भी खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ, अंपायर, मैच रेफरी या अन्य व्यक्ति के साथ अनुचित शारीरिक संपर्क करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
नियम के मुताबिक यदि कोई खिलाड़ी जानबूझकर, लापरवाही से या असावधानी में किसी अन्य खिलाड़ी से टकराता है, कंधा मारता है या शारीरिक संपर्क स्थापित करता है, तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
आईसीसी घटना की गंभीरता तय करते समय निम्न बिंदुओं पर विचार करती है—
- क्या संपर्क जानबूझकर किया गया था?
- क्या टकराव टाला जा सकता था?
- संपर्क कितना आक्रामक या जोरदार था?
- क्या किसी खिलाड़ी को चोट पहुंची?
- घटना के समय परिस्थितियां क्या थीं?
यदि मैच रेफरी को लगता है कि खिलाड़ियों ने नियमों का उल्लंघन किया है, तो चेतावनी, जुर्माना, डिमेरिट अंक या निलंबन जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

किसकी थी गलती?
घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में दिखाई देता है कि दोनों खिलाड़ियों के बीच पहले मौखिक बहस हुई और फिर मामला शारीरिक संपर्क तक पहुंच गया।
हालांकि उपलब्ध फुटेज के आधार पर किसी एक खिलाड़ी को पूरी तरह दोषी ठहराना आसान नहीं है। कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों खिलाड़ियों ने भावनाओं में आकर स्थिति को संभालने के बजाय उसे और बिगाड़ दिया।
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि श्रीलंकाई खिलाड़ी ने पहले उकसाने वाली टिप्पणी की थी, जबकि दूसरी ओर आलोचकों का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी को अपनी प्रतिक्रिया पर नियंत्रण रखना चाहिए था।
अंतिम निर्णय मैच रेफरी की रिपोर्ट और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों के आधार पर लिया जाएगा।
विशेषज्ञों की क्या राय है?
भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर आर अश्विन ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुपर ओवर के दौरान कुछ फैसलों और देरी के कारण भारतीय टीम पहले से ही नाराज थी।
अश्विन के अनुसार, श्रीलंकाई टीम द्वारा अपनाई गई कुछ रणनीतियां विरोधी टीम पर मानसिक दबाव बनाने का प्रयास थीं, जिससे खिलाड़ियों का गुस्सा बढ़ा।
वहीं वरिष्ठ खेल पत्रकार बोरिया मजूमदार ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी को इस घटना से सीख लेनी चाहिए। उनके अनुसार महान खिलाड़ी मैदान पर भी अपना संयम बनाए रखते हैं और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत होती है।
खेल पत्रकार कुशन सरकार ने वैभव का बचाव करते हुए कहा कि वह अभी केवल 15 वर्ष के हैं और क्रिकेट के इस सफर में उन्हें बहुत कुछ सीखना है। उनका मानना है कि युवा खिलाड़ी भावनाओं में बह सकते हैं, लेकिन समय के साथ उनमें परिपक्वता आती है।
भारत-ए की स्थिति हुई मुश्किल
इस हार के साथ भारत-ए को त्रिकोणीय श्रृंखला में तीन मैचों में दूसरी हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले टीम अफगानिस्तान-ए के खिलाफ भी डीएलएस नियम के तहत मुकाबला हार चुकी थी।
अब फाइनल में पहुंचने की राह भारत-ए के लिए कठिन हो गई है, जबकि श्रीलंका-ए की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है।
वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट का भविष्य माने जा रहे हैं और कम उम्र में उन्होंने अपनी प्रतिभा से दुनिया का ध्यान खींचा है। लेकिन इस घटना ने यह भी दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के साथ-साथ संयम और अनुशासन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
आईसीसी की जांच और मैच रेफरी की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस विवाद में किस खिलाड़ी की कितनी जिम्मेदारी थी। फिलहाल यह घटना युवा खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख के रूप में देखी जा रही है कि दबाव की परिस्थितियों में भी खेल भावना बनाए रखना सबसे जरूरी है।
