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हिमंत बिस्वा सरमा: असम में ऐतिहासिक जीत के बाद बीजेपी में कितना बढ़ा कद?

अक्टूबर 15, 2026 (अंतिम अद्यतन: मई 12, 2026) 1 मिनट पढ़ें
हिमंत बिस्वा सरमा

हिमंत बिस्वा सरमा

हिमंत बिस्वा सरमा ने असम विधानसभा चुनाव 2026 में शानदार जीत दर्ज कर एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह सिर्फ पूर्वोत्तर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बीजेपी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो चुके हैं। लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हिमंत बिस्वा सरमा की राजनीतिक ताकत और संगठनात्मक पकड़ अब खुलकर चर्चा का विषय बन चुकी है।

126 सदस्यीय असम विधानसभा में बीजेपी ने अकेले 82 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की, जबकि एनडीए गठबंधन को कुल 102 सीटें मिलीं। इस जीत को पार्टी कार्यकर्ता ऐतिहासिक बता रहे हैं और इसके केंद्र में हिमंत बिस्वा सरमा का नेतृत्व माना जा रहा है।

बीजेपी दफ्तर से लेकर कार्यकर्ताओं तक, हर जगह हिमंत की चर्चा
चुनाव नतीजों के बाद गुवाहाटी स्थित बीजेपी कार्यालय में जश्न के बीच सबसे अधिक चर्चा हिमंत बिस्वा सरमा के बढ़ते राजनीतिक कद की रही। कई कार्यकर्ताओं ने उन्हें भविष्य का राष्ट्रीय नेता बताया।

कुछ समर्थकों ने यहां तक कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद पार्टी में हिमंत बिस्वा सरमा सबसे मजबूत चेहरों में से एक बन सकते हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक इन दावों को अभी जल्दबाज़ी मानते हैं, लेकिन यह जरूर मानते हैं कि हिमंत अब सिर्फ असम तक सीमित नेता नहीं रहे।

असम से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर
साल 2015 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने बहुत कम समय में पार्टी के भीतर अपनी अलग पहचान बनाई। अमित शाह की रणनीति के तहत उन्हें नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) का संयोजक बनाया गया।

इसके बाद उन्होंने पूर्वोत्तर के क्षेत्रीय दलों को बीजेपी के साथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। असम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर जैसे राज्यों में बीजेपी या उसके सहयोगियों की सरकार बनने में उनकी रणनीति को निर्णायक माना गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमंत ने पूर्वोत्तर में कांग्रेस के लंबे प्रभुत्व को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई और बीजेपी को एक मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित किया।

बीजेपी के स्टार प्रचारकों में शामिल
बीते कुछ वर्षों में हिमंत बिस्वा सरमा बीजेपी के सबसे सक्रिय स्टार प्रचारकों में उभरे हैं। 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई राज्यों में लगातार प्रचार किया। उनकी आक्रामक शैली और हिंदुत्व आधारित भाषणों की तुलना अक्सर Yogi Adityanath से की जाती है।

बीजेपी नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के जिन चेहरों की लोकप्रियता और स्वीकार्यता सबसे अधिक है, उनमें योगी आदित्यनाथ और हिमंत बिस्वा सरमा प्रमुख हैं।

क्या प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैं हिमंत?
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी लगातार उठ रहा है कि क्या भविष्य में हिमंत बिस्वा सरमा प्रधानमंत्री पद के दावेदार बन सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बीजेपी का पूरा नेतृत्व और चुनावी चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले लोकसभा चुनावों में भी पार्टी मोदी के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगी।

हालांकि भविष्य की राजनीति को लेकर चर्चाओं में हिमंत, योगी आदित्यनाथ और देवेंद्र फडणवीस जैसे नेताओं के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं।

विश्लेषकों के अनुसार किसी भी संभावित उत्तराधिकारी के लिए तीन बातें सबसे अहम होंगी:

  • हिंदुत्व की राजनीति को आगे बढ़ाने की क्षमता
  • संगठन और पार्टी विस्तार की ताकत
  • आरएसएस के साथ मजबूत संबंध
  • आरएसएस और पार्टी नेतृत्व के साथ समीकरण

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि हिमंत बिस्वा सरमा के संबंध अमित शाह के साथ बेहद अच्छे हैं। वहीं प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके रिश्ते औपचारिक लेकिन संतुलित माने जाते हैं।

कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आरएसएस हिमंत को पूर्वोत्तर में बीजेपी के विस्तार का महत्वपूर्ण चेहरा मानता है। हालांकि आलोचक यह भी याद दिलाते हैं कि हिमंत का कांग्रेस से बीजेपी में आना उनके राजनीतिक करियर की एक कमजोर कड़ी माना जा सकता है।

अभी लंबा सफर बाकी
विश्लेषकों का मानना है कि हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में शीर्ष स्तर तक पहुंचने के लिए उन्हें अभी लंबा सफर तय करना होगा।

उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पूरे देश में व्यापक जनस्वीकार्यता बनाना है। हिंदी भाषण शैली, राष्ट्रीय स्तर पर लगातार मौजूदगी और केंद्रीय राजनीति में अनुभव जैसे कई पहलुओं पर उन्हें अभी काम करना होगा।

हालांकि इतना तय माना जा रहा है कि असम की इस बड़ी जीत ने बीजेपी में हिमंत बिस्वा सरमा की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर दी है।

असम चुनाव 2026 ने हिमंत बिस्वा सरमा को सिर्फ एक सफल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि बीजेपी के भविष्य के बड़े नेताओं की सूची में भी मजबूती से खड़ा कर दिया है। फिलहाल पार्टी का नेतृत्व नरेंद्र मोदी और अमित शाह के हाथों में सुरक्षित माना जाता है, लेकिन आने वाले वर्षों में हिमंत का राजनीतिक कद और प्रभाव दोनों बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

पूर्वोत्तर की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का उनका सफर अब भारतीय राजनीति की सबसे दिलचस्प कहानियों में से एक बन चुका है।

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